Archive for the ‘बनारस के कवि और शायर’ Category

बनारस के कवि/ उमाशंकर सिंह

Nashist-5/Syed Asfer Ali-2

शेर-ए-नशिस्त-3/केशव शरण

Nashist-1/Syed Asfer Ali

बनारस के कवि और शायर/ श्री विन्ध्याचल पाण्डेय

       आज मैं बनारस के एक काव्यजगत के अप्रतिम हस्ताक्षर और मेरे मित्र श्री विन्ध्याचल पाण्डेय की रचनाएं आप के समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ। श्री विन्ध्याचल पाण्डेय बनारस काव्य-मंचों के बहुत ही मशहूर कवि हैं और ये अपनी कविता में नये तेवर के लिए जाने जाते हैं। आशा है आपको ये रचनाएं पसन्द आयेंगी….

ग़ज़ल-1

अजीब बात अजीब दौर अजब लोग यहाँ।
न जाने कौन-सा फैला हुआ है रोग यहाँ।


उपनिषद, वेद, संहिताएं कौन गुनता है,
बदल कलेवर हुआ योगा अब तो योग यहाँ।


धर्म के मर्म से अनजान इण्डिया वाले,
त्याग, वैराग्य पर भारी है अब तो भोग यहाँ।


डूबती नाव, भंवर और नशे में माझी,
बन रहा इस तरह हठाग्रही कुयोग यहाँ।


अर्थ के फेर में अनर्थ का समर्थन है,
उदारता में उदारीकरण का सोग यहाँ।

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ग़ज़ल-2

सच न कहेंगे, सच न सुनेंगे, इसलिए हम है आज़ाद।
सुरा-सुन्दरी, भ्रष्टाचार जिन्दाबाद, जिन्दाबाद।


सुविधा-शुल्क और महंगाई, इसीलिए सरकार बनाई,
कौन सुनेगा किसे सुनाएं अब जाकर जनता फरियाद।


सूर, कबीर, निराला, तुलसी, गालिब, मीर मील के पत्थर,
नई फसल के लिए शेष है अब तो केवल वाद-विवाद।


सेण्टीमेण्ट विलुप्त हो रहा, इन्स्ट्रुमेन्टल प्यार हो गया,
झूम रहे हैं, घूम रहे हैं, कौन करे इसका प्रतिवाद।


क्षेत्रवाद, आतंकवाद को भाषा, धर्म से जोड़ा,
सत्ता वाली कुर्सी खातिर, करते नए-नए इजाद।

वन-टू का फ़ोर, फ़ोर-टू का वन

मित्रों ! जैसे-जैसे समय बीत रहा है हम सभी ब्लागरों को ज्ञान प्राप्त हो रहा है कि कई-कई ब्लागों से अच्छा है एक ही ब्लाग होना। मैंने भी अब केवल दो ब्लाग रखने का फैसला किया है- एक अपनी रचनाओं के लिए और एक भारत के दूसरे विभिन्न रचनाकारों के लिए। अपने अन्य रचनाकारों के लिये मौजूद दो ब्लागों “समकालीन ग़ज़ल” और “बनारस के कवि और शायर” को मिलाकर एक ब्लाग मे समाहित कर मैंने ये ब्लाग गीत,ग़ज़ल,कविता की दुनिया”  बनाया है। सबसे पहले दोनो ब्लागों के पुराने पोस्ट मैंने इस पर पोस्ट किया है। आशा है आप को भी सुविधा होगी……

श्रद्धांजलि/रामदास ‘अकेला’

प्रिय मित्रों, वाराणसी के काव्य-संसार के एक सशक्त हस्ताक्षर श्री रामदास ‘अकेला’ जी ( जिनकी गज़लें आप ‘‘बनारस के कवि और शायर/रामदास अकेला’’ में पढ़ चुके हैं ) ; इस नश्वर दुनिया को छोड़ गये। वाराणसी से बाहर होने के कारण मुझे इसका पता देर से चला……. दिवंगत काव्यात्मा को मेरी ओर से विनम्र श्रद्धांजलि………..

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