Archive for the ‘खेल ज़गत’ Category

भारत की कमजोर गेंदबाजी का सच

          आजकल भारतीय क्रिकेट टीम एक नए दौर से गुजर रही है | टीम में नए खिलाड़ी ज्यादा हैं जो कुछ समय बाद ही अनुभव के साथ परिपक्व होंगे | लेकिन एक बात जो गौर करने वाली है वह है टीम में अच्छे तेज गेंदबाजों का अभाव | आखिर इसकी वजह क्या है ? एक बड़ी वजह है आई.पी.एल. | देश के कई गेंदबाज अब केवल आई.पी.एल. के लिए खेलकर इतना कमा रहे हैं कि उनके लिए अब देश महत्वपूर्ण नहीं रह गया है | वे आई.पी.एल. के समय एकदम ठीक रहते हैं पर भारत की टीम के लिए अनफिट रहते हैं, उन्हें चोट लगी होती है | एक नाम नहीं है -प्रवीण कुमार, इरफान खान, आर.पी.सिंह, मुनाफ पटेल, गोनी आदि कई ऐसे खिलाड़ी है | बल्लेबाजी में तो गनीमत है पर गेंदबाजी में भारत के पिछड़ने का यही मुख्य कारण अब नज़र आ रहा है | देश के बेहतरीन तेज गेंदबाज अब भारत के टीम में नहीं आना चाहते हैं क्योकि कम समय में खेलकर जब ज्यादा पैसा  मिल रहा हो तो कोई साल भर पसीना क्यों बहाए ?  कपिलदेव , श्रीनाथ, चेतन शर्मा, मदन लाल , रोजर बिन्नी, मनोज प्रभाकर, करसन घावरी आदि जैसे तेज गेंदबाज कहां है जो अपना पूरा दमखम देश के लिए लगा दें | एकदिवसीय मैचों में तो अंतिम ओवरों में आजकल बुरा हाल होता है | गेंदबाज पिटते रहते हैं  और  यार्कर, स्लो बाल आदि वेरिएशन के बदले गुडलेंथ बाल या फुलटास फेकते रहते हैं | कई बार तो क्षेत्ररक्षण के अनुसार ही बाल नहीं होती | बालिंग कोच क्यों रखे गए हैं, ये पूछनेवाला कोई नहीं है | आई.पी.एल. में फिक्सिंग का अलग ही गुल खिला हुआ है जिसकी वजह से श्रीसंत जैसे कई खिलाडियों ने स्वयं अपनी ज़िंदगी तबाह कर ली है | क्या कोई रास्ता बचा है जो इस खेल को देशप्रेम से जोड़ते हुए आगे ले जाएगा ? खिलाड़ी, कोच, बोर्ड अपनी जिम्मेदारी कब समझेंगे ? मेरे ख्याल से जो खिलाड़ी देश के लिए अनफिट हो और केवल आई.पी.एल. के लिए फिट होकर अवतरित होता हो उसपर रोक लगनी चाहिए तभी भारत की गेंदबाजी में सुधार हो सकता है अन्यथा केवल बचे-खुचे खिलाड़ियों के दम पर टेस्ट श्रृंखला या कोई कप जीतना बहुत मुश्किल होगा और कभी जीत भी गए तो ये संयोग मात्र ही होगा | आप का क्या विचार है ?

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भारत ने इतिहास रचा

            जी हां ! आज भारत ने एक इतिहास रच दिया | एकदिवसीय मैच के इतिहास में यह दूसरी सबसे बड़ी जीत है | भारत ने एक बड़े अंतर नौ विकेट से आज जीत हासिल कर पूरे भारत के खेल-प्रेमियों को अनोखा तोहफा दिया है |  आस्ट्रेलिया ने जब 359 रन बनाए तो कोई ये उम्मीद नहीं कर रहा था की आज भारत जीत पायेगा, पर रोहित शर्मा के नाबाद 141 रन, शिखर धवन के 95 रन और विराट कोहली के नाबाद 100 रनों ने आस्ट्रेलिया के इतने विशाल पहाड़ सरीखे स्कोर  को बौना साबित करते हुए इतिहास रच दिया | उन्होंने यह जीत अभी 39 गेंद रहते हासिल की जो इस विजय को और महत्वपूर्ण  बनाती है | सभी देशवासियों को यह ऐतिहासिक जीत मुबारक….

चैम्पियंस की चैम्पियंस ट्राफी

      वाह ! ये हुई न बात ! चैम्पियंस ट्राफी में भारतीय टीम वाकई चैम्पियन की तरह खेली | कोई भी विरोधी टीम हो नतीजा हर बार भारत के पक्ष में रहा | बल्लेबाजी हो या गेंदबाजी या फील्डिंग , हर विभाग में टीम ने औरों से बेहतर खेल दिखाया | फील्डिंग की वजह से हर बार विपक्षी टीम ने ३० से ४० रन कम बनाए; जिसका नतीजा ये रहा की वो टीम भारत का मुकाबला नहीं कर पाई | सबसे अच्छी बात ये रही की हमारी बल्लेबाजी पूरे रंग में रही | भारतीय टीम ने हर खेल में अच्छे रन बनाए; हालांकि फाइनल मुकाबला इसका अपवाद रहा पर उस समय बारिश की वजह से जो व्यवधान हुआ उसके कारण भी कुछ कम रन बने क्योंकि बल्लेबाजी की लय बार-बार टूट रही थी | फिर भी गेंदबाजों ने हिम्मत नहीं हारी और अच्छे फील्डिंग के साथ ने रोमांचक मैच का निर्णय भारत के पक्ष में कर दिया | गोल्डन बैट के विजेता शिखर धवन, मैन ऑफ़ द मैच और गोल्डन बाल के विजेता रवीन्द्र जडेजा ने बेहतरीन खेल जारी रखा तथा फाइनल में विराट कोहली ने भी अच्छे हाथ दिखाए और मैच के बाद डांस का क्या कहना ! है न ! भारतीय टीम को चैम्पियंस ट्राफी जीतने की बहुत-बहुत बधाई…

एक और हार…

         आखिर एक और हार हो गयी। और वो भी पाकिस्तान से……क्या हो गया है हमारे सबसे सफल कप्तान को ? हर पासा उल्टा पड़ रहा है। जो भी चाल इस समय धोनी चल रहे हैं वह दांव हार जाते हैं। कुछ तो गड़बड़ जरूर है ( धारावाहिक ” सी.आई.डी” के प्रद्युम्न की तरह)। है न ! लेकिन इसमें उनकी ख़ुद की गलतियाँ ज्यादा हैं। क्या जरूरत थी आठ-आठ बल्लेबाज खिलाने की ? क्या जरूरत पड़ गयी थी केवल तीन विशेषज्ञ गेंदबाजों को लेकर मैदान में उतरने की ? इतना सब किया तो किया पर क्या जरूरत थी आखिरी ओवर जडेजा से कराने की ? आखिरी ओवर के लिये पहले से कोई योजना क्यों नहीं बनी ? जडेजा पिछले दस मैचों में न तो बल्लेबाजी में चल रहें हैं न तो गेंदबाजी में। उन्होंनें दस मुकाबलों में केवल 18 रन बनाये हैं और केवल चार विकेट लिया है। फिर उन्हें खिलाने की जरूरत क्या है ? युसुफ पठान और इरफान पठान में से भी कोई होता तो इतने बुरे हालात नहीं होते। बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों की शुरुआत शानदार होते हुए भी हम मैच हार रहे हैं। क्यों ? क्या कोई जवाब मिलने वाला है ?

डंकन फ़्लेचर क्यों?

                                                             Photo from znn.india.com
       दोस्तों ! भारतीय क्रिकेट आज जितना नीचे जा चुका है, वह किसी से छुपा नहीं है। लेकिन मूल कारण क्या है इस पर चर्चा बहुत ही कम होती है। वह कारण है भारतीय टीम का कोच। भारत ने विदेशी कोच रखने का जो सिलसिला प्रारम्भ किया है वह कुछ समय के लिये तो ठीक था परन्तु हमेशा के लिये ठीक नहीं है। सभी विदेशी कोच अच्छी नीयत के साथ भारत नहीं आते। इसका सबसे बढ़िया उदाहरण ग्रेग चैपल हैं। अपने कोच रहते ग्रेग चैपल अपनी तरफ से पूरी कोशिश की कि भारत की लुटिया पूरी तरह से डुबो दी जाए। टीम के सदस्यों में आपसी मनमुटाव को बढ़ावा देना, अच्छे खिलाड़ियों की गेंदबाजी या बल्लेबाजी बिगाड़ना, भारतीय क्रिकेट को रसातल में ले जाना इत्यादि ये सभी ग्रेग चैपल की प्राथमिकताएं थी जिसे काफी हद तक उन्होंने पूरा किया। अब यही काम डंकन फ्लेचर कर रहे हैं। गैरी कर्स्टेन इसके अपवाद थे और टीम का प्रदर्शन भी उस समय अच्छा था इसलिए वो बच गये। मेरे विचार से भारत का कोच किसी भारतीय को ही होना चाहिए क्योंकि भारतीय कोच ही यहाँ के खिलाड़ियों की भावना को और खेल में हार-जीत की वजह से पूरे भारत की जनता की भावना को समझ सकता है और उसका उपाय ढूंढ सकता है। विदेशी कोच तो बस पैसे के लिए यहाँ आते हैं और अपना उल्लू सीधा कर चलते बनते हैं, उनकी कोई जवाबदेही भी नहीं बनती।  है कि नहीं ! आप का विचार क्या है ?

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