Archive for the ‘आडियो/वीडियो’ Category

श्री रामदरश मिश्र जी की एक कविता/कंचनलता चतुर्वेदी

मित्रों ! मैं आज से एक नै शुरुआत कर रहा हूँ | वह है- पुराने रचनाकारों की रचनाओं को कवितापाठ के जरिये आपतक पहुँचाना | इस क्रम में श्री रामदरश मिश्र जी की कविता श्रीमती कंचनलता चतुर्वेदी के स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ | आशा है पुराने रचनाकारों को सम्मान देने का यह तरीका आपको जरूर पसंद आयेगा |इस रचना का वास्तविक आनंद Youtube पर सुन कर ही आयेगा, इसलिए आपसे अनुरोध है कि आप मेरी मेहनत को सफल बनाएं और वहां इसे जरूर सुनें…
 

आंधियाँ भी चले और दिया भी जले

मित्रों ! एक रचना अपनी आवाज़ में  प्रस्तुत कर रहा हूँ, आशा है आप को अवश्य पसंद आयेगी…
इस रचना का वास्तविक आनंद Youtube पर सुन कर ही आयेगा, इसलिए आपसे अनुरोध है कि आप मेरी मेहनत को सफल बनाएं और वहां इसे जरूर सुनें…


आंधियाँ भी चले और दिया भी जले ।
होगा कैसे भला आसमां के तले ।

अब भरोसा करें भी तो किस पर करें,
अब तो अपना ही साया हमें ही छले ।

दिन में आदर्श की बात हमसे करे,
वो बने भेड़िया ख़ुद जंहा दिन ढले ।

आवरण सा चढ़ा है सभी पर कोई,
और भीतर से सारे हुए खोखले ।

ज़िन्दगी की खुशी बांटने से बढ़े ,
तो सभी के दिलों में हैं क्यों फासले ।

कुछ बुरा कुछ भला है सभी को मिला ,
दूसरे की कोई बात फ़िर क्यों खले ।

कृपया आप यहाँ अवश्य पधारें :-

श्री रामदरश मिश्र जी की एक कविता/कंचनलता चतुर्वेदी

बड़ी मुश्किल है बोलो क्या बताएं…

अपनी आवाज़ में एक ग़ज़ल [ “मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन फ़ऊलुन” पर आधारित ] प्रस्तुत कर रहा हूँ…
इस रचना का वास्तविक आनंद Youtube पर सुन कर ही आयेगा, इसलिए आपसे अनुरोध है कि आप मेरी मेहनत को सफल बनाएं और वहां इसे जरूर सुनें…

  
बड़ी मुश्किल है बोलो क्या बताएं
न पूछो कैसे हम जीवन बिताएं।


अदाकारी हमें आती नही है,
ग़मों में कैसे अब हम मुस्कुराएं।


अँधेरा ऐसा है दिखता नही कुछ,
चिरागों को जलाएं या बुझाएं।


फ़रेबों,जालसाजी का हुनर ये,
भला खुद को ही हम कैसे सिखाएं।


ये माना मुश्किलों की ये घडी़ है,
चलो उम्मीद हम फिर भी लगाएं।


सियासत अब यही तो रह गई है,
विरोधी को चलो नीचा दिखाएं।


अगर सच बोल दें तो सब खफ़ा हों,
बनें झूठा तो अपना दिल दुखाएं।

जब भी सोचूँ अच्छा सोचूँ /pbchaturvedi

मित्रों ! एक पूर्वप्रकाशित रचना अपनी आवाज में प्रस्तुत कर रहा हूँ , इस रचना का संगीत-संयोजन और चित्र-संयोजन भी मैंने किया है | आप से अनुरोध है कि आप मेरे Youtube के Channel पर भी Subscribe और Like करने का कष्ट करें ताकि आप मेरी ऐसी रचनाएं पुन: देख और सुन सकें | आशा ही नहीं वरन पूर्ण विश्वास है कि आप इस रचना को अवश्य पसंद करेंगे |
इस रचना का वास्तविक आनंद Youtube पर सुन कर ही आयेगा, इसलिए आपसे अनुरोध है कि आप मेरी मेहनत को सफल बनाएं और वहां इसे जरूर सुनें…
जब भी सोचूँ अच्छा सोचूँ।
मैं तो केवल इतना सोचूँ।

बालिग होकर ये मुश्किल है,
आओ खुद को बच्चा सोचूँ।

सोच रहे हैं सब पैसों की,
लेकिन मैं तो दिल का सोचूँ।

बातों की तलवार चलाए,
कैसे उसको अपना सोचूँ।

ऊपर वाला भी कुछ सोचे,
मैं ही क्योंकर अपना सोचूँ।

जो भी होगा अच्छा होगा,
मैं बस क्या है करना सोचूँ।

अमर गायक मुकेश के जन्मदिन पर….

मित्रों ! आज मेरे प्रिय गायकों में से एक मुकेश जी का जन्मदिन है | हालांकि मैं इस समय टान्सिल से परेशान हूँ पर पर इस दिन को ऐसे नहीं जाने दूंगा | इसलिए मुकेशजी का ये गीत आज प्रस्तुत कर रहा हूँ….

दर्द दिलों के कम हो जाते….

शाम्भवी की आवाज़ में लीजिए एक नए फिल्म का ये गीत प्रस्तुत है…

बड़ी दूर से आये हैं….

मित्रों ! अपना एक मनपसंद गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जो आशा है आप को भी पसंद होगा….

आप से अनुरोध है कि आप मेरे Youtube के Channel पर भी Subscribe और Like करने का कष्ट करें ताकि आप मेरी ऐसी रचनाएं पुन: देख और सुन सकें

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