सबसे पहले तो प्रधानमंत्री मोदी जी और उनके मंत्रिमंडल को बधाई | देखते ही देखते अन्ततः मोदी की सरकार बन ही गयी | विरोधी बगले झांकते रह गए और भाजपा सत्ता में दस साल बाद पुनः वापस आ गयी | सच पूछिए तो ये जरूरी भी था | सत्ता का हस्तांतरण यदि इसी तरह कम से कम दस सालों में होता रहे तो कई चीजें अपने आप संतुलित हो जायेंगी | नेता मदांध होकर नहीं कुर्सी पर नहीं बैठेगे जैसा कांग्रेस के कुछ नेताओं के आचरण में दिख रहा था | कल जब सभी अपनी शपथ ले रहे थे तो मुझे मनमोहन सिंह जी की याद आ गयी | उन्होंने और उनके मंत्रिमंडल ने भी तो यह शपथ लिया था कि “जब ऐसा करना अपेक्षित न हो मैं कोई सूचना प्रकट नहीं करूंगा” पर क्या ऐसा हुआ ? उन्हें तो संविधान की और इस शपथ की परवाह किये बिना सूचनाओं को अपने सुपर बॉसद्वय को मजबूरी में बताना ही पड़ता था और इस बात कई बार प्रमाण हम सबको मिल ही चुके हैं | प्रधानमंत्री मोदी जी ने अपने पहले ही कुछ फैसलों में अपनी अलग एक झलक दिखाई है और पूरी उम्मीद है ये आगे भी बरक़रार रहेगा | सार्क देशों के सभी राष्ट्राध्यक्षों को बुलाना और अपनी पहली ही कैबिनेट मीटिंग में काला धन पर एस.आई.टी. बनाना ऐसे फैसले हैं जिनके असर दूरगामी हो सकते हैं |
        अब बात कुछ समाचार चैनलों की कर लें | ये बात-बात पर भारत और पाकिस्तान की जनता को आमने-सामने बिठाकर ऐसे प्रश्न पूछने लगते हैं मुझे उस समय इनकी समझ पर तरस आने लगता है | अब नवाज शरीफ ने देर से  भारत आने का फैसला क्यों लिया इसको वहां की जनता कैसे बता सकती है ? ऐसे कई प्रश्न मुझे बेतुके से लगे | इस कार्यक्रमों से ऐसा लग रहा था जैसे अभी युद्ध करवा कर ही ये मानेंगे और इन्हें  अपने या किसी भी देश की जनता की भावना से खिलवाड़ करने की छूट मिली हुई है | इन चैनलों को भी कुछ जिम्मेदारी समझनी चाहिए |
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Comments on: "बधाई/उफ़ ! ये समाचार चैनल…" (6)

  1. सटीक और दो टूक। शब्द की शक्ति ब्रह्ममय होते देखी। दस साला कांग्रेसी तम्बू उखड़ गए ,एक तीर भी न चला। बधाई।

  2. बहुत सही इन्हें समय बिताना है इसलिए बेतुके सवाल करते रहते हैं एक ही विषय पर दिन रात झांकते रहना इनकी मज़बूरी बन गया है , आखिर 24 घंटे क्या क्या दिखाए ? इसलिए बेसिरपैर बातें देखने सुनने को मिलती है और मजबूर हो टी वी बंद करना पड़ता है जबरन बाल की खाल निकलना न्यूज़ चैनल का स्थाई कार्यक्रम बन गया है दूसरे शब्दों में पकाना मुख्य उद्देश्य हो गया है

  3. इन बेतुके प्रश्न उठाकर जनता का समय बर्बाद करते हैं और बातावरण को दूषित करते हैं !

  4. इन चेनलों को अपना प्रसारण भी तो करना है … समय बेचना तो है वर्ना कैसे करेंगे …

  5. नमस्कार जी
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  6. सच कहा आपने. मीडिया अक्सर भूल जाता है की वो जो कर रहा है उससे कुछ बेहतर भी कर सकता था

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