दिल का कहना जरूर माना करो।
ख़ुद को ख़ुद से ख़फ़ा किया ना करो।

चीज कोई जो तुमको पानी है ,
ख़ुद को उसके लिए दीवाना करो।

जब भला तुम किसी का कर न सको ,
तुम किसी का कभी बुरा ना करो।

आजमाते रहे हो जीवन भर,
बन्द अब ख़ुद को आजमाना करो।

झूठी तारीफ़ रूबरू जो करे,
उसको हमदर्द तुम न माना करो।

तुममें भी इक खु़दा तो रहता है,
तुम हमेशा खु़दा-खु़दा ना करो।

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Comments on: "दिल का कहना जरूर माना करो" (22)

  1. जब भला तुम किसी का कर न सको ,तुम किसी का कभी बुरा ना करो। बहुत सुंदर कविता लिखी आप ने धन्यवाद

  2. जब भला तुम किसी का कर न सको ,
    तुम किसी का कभी बुरा ना करो।
    बहुत सुंदर कविता लिखी आप ने
    धन्यवाद

  3. वाह जी बहुत सुन्दर, अगर कुछ पाना है तो उसके लिए अपने आप को दीवाना करना बहुत जरुरी है!!

  4. वाह जी बहुत सुन्दर, अगर कुछ पाना है तो उसके लिए अपने आप को दीवाना करना बहुत जरुरी है!!

  5. वकील साहेब |सुनो सब की करो मनकी _कुछ पाना है तो उस हेतु अपने को समर्पित करदो _किसी का बुरा मत करो _अपने आप को कहाँ तक आजमाओगे_झूंठी तारीफ मत सुनो और अपने अन्दर ही ईश्वर को तलाशो |सुंदर ग़ज़ल

  6. वकील साहेब |सुनो सब की करो मनकी _कुछ पाना है तो उस हेतु अपने को समर्पित करदो _किसी का बुरा मत करो _अपने आप को कहाँ तक आजमाओगे_झूंठी तारीफ मत सुनो और अपने अन्दर ही ईश्वर को तलाशो |सुंदर ग़ज़ल

  7. चीज कोई जो तुमको पानी है ,ख़ुद को उसके लिए दीवाना करोकुछ paane के लिए……deevaangi jaroori है………… लाजवाब लिखा है

  8. चीज कोई जो तुमको पानी है ,
    ख़ुद को उसके लिए दीवाना करो

    कुछ paane के लिए……deevaangi jaroori है………… लाजवाब लिखा है

  9. जब भला तुम किसी का कर न सको ,तुम किसी का कभी बुरा ना करो।बहुत अच्छी सीख दी है आपने….बेहतरीन ग़ज़ल…बधाई..नीरज

  10. जब भला तुम किसी का कर न सको ,
    तुम किसी का कभी बुरा ना करो।
    बहुत अच्छी सीख दी है आपने….बेहतरीन ग़ज़ल…बधाई..
    नीरज

  11. सुन्दर ग़ज़ल है. तुममें भी इक खु़दा तो रहता है,तुम हमेशा खु़दा-खु़दा ना करो। ये शेर बहुत पसंद आया.

  12. सुन्दर ग़ज़ल है.
    तुममें भी इक खु़दा तो रहता है,
    तुम हमेशा खु़दा-खु़दा ना करो।
    ये शेर बहुत पसंद आया.

  13. सुन्दर ग़ज़ल के सभी शेर पसंद आये.बधाई.

  14. सुन्दर ग़ज़ल के सभी शेर पसंद आये.
    बधाई.

  15. 'तुममें भी इक खु़दा तो रहता है,तुम हमेशा खु़दा-खु़दा ना करो। '-बहुत खूब.

  16. 'तुममें भी इक खु़दा तो रहता है,
    तुम हमेशा खु़दा-खु़दा ना करो। '
    -बहुत खूब.

  17. वाह क्या बात है! ग़ज़ल के सभी शेर मुझे बेहद पसंद आया! लिखते रहिये!

  18. वाह क्या बात है! ग़ज़ल के सभी शेर मुझे बेहद पसंद आया! लिखते रहिये!

  19. आज आपके ब्लॉग पर बहुत दिनों बाद आना हुआ. अल्प कालीन व्यस्तता के चलते मैं चाह कर भी आपकी रचनाएँ नहीं पढ़ पाया. व्यस्तता अभी बनी हुई है लेकिन मात्रा कम हो गयी है…:-)हमेशा की तरह उत्कृष्ट रचना…बधाई स्वीकारें… नीरज

  20. आज आपके ब्लॉग पर बहुत दिनों बाद आना हुआ. अल्प कालीन व्यस्तता के चलते मैं चाह कर भी आपकी रचनाएँ नहीं पढ़ पाया. व्यस्तता अभी बनी हुई है लेकिन मात्रा कम हो गयी है…:-)

    हमेशा की तरह उत्कृष्ट रचना…बधाई स्वीकारें…

    नीरज

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